आजकीबात


 

बातों में वो पल थे ,

या वो पल की बातें थी।

पलकों पे सजा कर रखा था जिसे,

आज शब्दो के मोती पिरो दिए ।

बांधे तुमने जो स्वपन हरियाल,

आओ मिलकर ले उन्हें संभाल,

किस्तो में हैं जिन्दजी,

आओ ले कस्ती उतार ।

शाझा कर सारे रिश्ते,

आओ एक दुनिया बसाए,

हँसी खुसी अपने पल बिताए,

जीवन से ले कुछ किस्ते उधार ।

रखकर सारे उम्मीदों के पहाड़,

छोड़ के सारे बहाने हज़ार,

आओ चल चले उस नादिये के पार,

बसाए अपना एक नया संसार।

#आजकीबात #शुभरात्री

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18 thoughts on “आजकीबात

  1. अच्छा प्रयास मासूम..
    लिखते रहो..
    और हिन्दी कविताएँ अपेक्षित हैं आपकी कलम से…☺

    1. दरअसल सितम्बर में हर जगह, हिन्दी दिवस मनाया जाता है, कई रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किये जाते है । आपका आभार ।

      1. Accha… Mujhe pata hi nahi tha…Dhanyavad Aapke Uttar ka…(muaaf karna mere is tarah Hindi likhne mei bhool chook ho gayi ho toh… adaat nahi rahi 😊🙏🏼)

  2. Updated :

    बातों में वो पल थे ,

    या वो पल की बातें थीं।

    पलकों पर सजा कर रखा था जिसे,

    आज शब्दों के मोती पिरो दिए ।

    बांधे तुमने जो स्वप्न हरियाल,

    आओ मिलकर ले उन्हें संभाल,

    किश्तों में है जिन्दगी,

    आओ ले कश्ती उतार ।

    साझा कर सारे रिश्ते,

    आओ एक दुनिया बसाए,

    हँसी खुशी अपने पल बिताएं,

    जीवन से ले कुछ किश्तें उधार ।

    रखकर सारे उम्मीदों के पहाड़,

    छोड़ के सारे बहाने हज़ार,

    आओ चल चले उस नादिया के पार,

    बसाएं अपना एक नया संसार।

    #आजकीबात

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